दिल्ली में 8 साल के कार्यकाल में दोगुना हुआ यमुना का प्रदूषण, रिपोर्ट में हुआ खुलास

नई दिल्ली, पिछले आठ वर्षों में दिल्ली में यमुना नदी का प्रदूषण भार दोगुना हो गया है। उपराज्यपाल कार्यालय ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए इस आशय की जानकारी सोमवार को साझा की।

डीपीसीसी ने पेश किए आंकड़े

दरअसल, डीपीसीसी और जल बोर्ड ने शनिवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना को यमुना में प्रदूषण पर एक प्रेजेंटेशन दिया। दरअसल, नदी की सफाई के लिए नौ जनवरी को एनजीटी द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की पहली बैठक लेने से पहले एलजी ने जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए उक्त दोनों विभागों की एक बैठक की थी। मालूम हो कि एनजीटी ने एलजी को ही इस समिति का प्रमुख बनाया है। डीपीसीसी के आंकड़ों से पता चलता है कि जैविक आक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर 2014 से पल्ला में, जहां नदी दिल्ली में प्रवेश करती है, दो मिलीग्राम प्रति लीटर की अनुमेय सीमा के भीतर बना हुआ है।

बीओडी, पानी की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है। साथ ही एरोबिक सूक्ष्मजीवों द्वारा जल निकाय में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा है। बीओडी का स्तर तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से कम अच्छा माना जाता है।

ओखला बैराज में, जहां नदी दिल्ली छोड़ती है और उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है, बीओडी का स्तर 2014 में 32 मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़कर 2023 में 56 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया है।

डीपीसीसी हर महीने पल्ला, वजीराबाद, आइएसबीटी पुल, आइटीओ पुल, निजामुद्दीन पुल, आगरा नहर, ओखला बैराज, ओखला बैराज और असगरपुर में नदी के पानी के नमूने एकत्र करता है। सूत्र ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में नदी में प्रदूषण का भार दोगुना हो गया है। “प्रदूषण में साल-दर-साल वृद्धि 2014 के बाद से 2019 के एकमात्र अपवाद के साथ लगातार रही है, जब हरियाणा ने यमुना नहर की मरम्मत का काम करते हुए हथिनी कुंड बैराज से यमुना में अधिक पानी छोड़ा था, इसके परिणामस्वरूप प्रदूषक बह गए थे।

आइएसबीटी में बीओडी का स्तर, नजफगढ़ नाले के यमुना में गिरने के ठीक बाद, 2014 में 26 मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़कर 2017 में 52 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया और “आज भी 38 मिलीग्राम प्रति लीटर के उच्च स्तर पर बना हुआ है”। नजफगढ़ नाले का यमुना में छोड़े जाने वाले अपशिष्ट जल का 68.71 प्रतिशत हिस्सा है। आज भी अनुपचारित सीवेज को नाले में और फिर यमुना में छोड़ा जा रहा है।

दिल्ली में है 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

उन्होंने कहा कि दिल्ली में 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में से सिर्फ नौ डीपीसीसी मानकों का पालन करते हैं। डीपीसी नियमों के अनुसार, उपचारित अपशिष्ट जल में बीओडी और टीएसएस (कुल घुलनशील ठोस) 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए।

दिल्ली एक दिन में लगभग 768 मिलियन गैलन (एमजीडी) सीवेज उत्पन्न करती है, जिसे 530 एमजीडी की संचयी उपचार क्षमता वाले इन 35 एसटीपी में उपचारित किया जाता है। हालाँकि, ये एसटीपी अपनी स्थापित क्षमता के केवल 69 प्रतिशत पर कार्य करते हैं और इसलिए प्रभावी रूप से रोजाना केवल 365 एमजीडी सीवेज का उपचार किया जाता है।

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