कौन हैं केजरीवाल सरकार के मंत्री राज कुमार आनंद, जिनके घर पर ED ने मारा छापा? गरीबी और संघर्ष भरा रहा जीवन

 नई दिल्ली। शराब नीति घोटाला मामले में फंसी आम आदमी पार्टी (AAP) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर जहां बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय ने आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के लिए बुलाया है, वहीं दिल्ली के एक और मंत्री राजकुमार आनंद के घर भी ईडी की छापेमारी सुबह से ही चल रही है।

हालांकि यह खबरें हैं कि यह छापेमारी शराब नीति से नहीं जुड़ी है, लेकिन किस मामले में है अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है। इस तरह वह आम आदमी पार्टी के छठे बड़े नेता बन गए हैं जिन पर ईडी का शिकंजा कस चुका है।

इससे पहले अरविंद केजरीवाल, सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अमानतुल्लाह खान भी ईडी के रडार पर हैं। हालांकि सभी नेता शराब घोटाला में ही लिप्त नहीं है लेकिन अधिकतर इसी में आरोपित हैं।

ढ़ाई लिखाई में बेहद रुचि रखने वाले राजकुमार आनंद का सारा जीवन संघर्ष से भरा रहा है। जीवनयापन के लिए उन्होंने बाल मजदूरी तक की है।

गरीबी के चलते मां-बाप से होना पड़ा दूर, नाना ने की परवरिश

पटेल नगर इलाके में बेहद लोकप्रिय AAP नेता राजकुमार ने आर्थिक तंगी को बहुत पास से देखा है। बचपन में गरीबी ने उन्हें माता-पिता से दूर कर दिया। गरीबी के कारण उनके माता-पिता को उन्हें उनके नाना-नानी के पास अलीगढ़ भेजना पड़ा।

कबाड़ी का काम करते था नाना, मुश्किलों से नाती को पढ़ाया

नाना-नानी के घर पहुंचकर भी राजकुमार आनंद की मुश्किलें आसान नहीं हुईं। हालांकि, थोड़ी राहत जरूर मिली। अभाव का सिलसिला यहां पर भी जारी रहा, क्योंकि उनके नाना कबाड़ी का काम करते थे। उनकी आर्थिक स्थिति भी उतनी अच्छी नहीं थी, जिससे वे अपने नाती को पढ़ा पाते।

बाल मजदूरी कर उठाया पढ़ाई का खर्च

राजकुमार आनंद को अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के लिए अलीगढ़ के ताला फैक्ट्री में एक बाल मजदूर के रूप में भी काम करना पड़ा। यह राजकुमार का जुनून ही था कि उन्होंने अध्ययन जारी रखा। राजकुमार खुद मानते हैं कि उन्हें पढ़ाई-लिखाई करना बहुत पसंद था। यही वजह है कि पढ़ाई जारी रखने के लिए बाल मजदूरी करना भी खला नहीं।

ट्यूशन से निकाला MA-LLB की पढ़ाई का खर्च

स्कूली और कालेज की पढ़ाई भी राजकुमार ने मुश्किल से की। एमए और एलएलबी की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे तो उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। हालात फिर भी नहीं सुधरे तो फैक्ट्रियों के बाहर फेके गए फोम से तकिया बनाना शुरू किया। अथक प्रयास के बाद वह रैक्सीन लेदर के एक सफल व्यवसायी भी बने।

समाज सेवा के लिए हमेशा हमेशा समर्पित

समाज सेवा के क्षेत्र में भी राजकुमार का विशेष योगदान रहा है। वंचित तबके के लोगों की बेहतरी के लिए अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर ‘आनंदपथ पथ फाउंडेशन’ का निर्माण किया। इसके तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक अभाव से जूझ रहे बच्चों के लिए ‘डॉ. आंबेडकर पाठशाला’ के नाम से एक ट्यूशन सेंटर की भी शुरुआत की।

कोरोना की चपेट में दो-दो बार आए फिर नहीं रुकी समाज सेवा

राजकुमार आनंद दो-दो बार कोविड पाजिटिव हुए, लेकिन बिना रुके अपने क्षेत्र की जनता की मदद करते रहे। अप्रैल-मई के दौरान जब दिल्ली में आक्सीजन बेड की कमी होने लगी, तब इन्होंने चीन से आक्सीजन कंसल्ट्रेटर बुलाकर पटेल नगर में 40 आक्सीजन बेड का एक ‘कोविड केयर सेंटर’ बनाया। इस प्रयास लोगों का इलाज हुआ और जानें बचीं।

अरविंद केजरीवाल को पसंद आई राजकुमार की सादगी

राजकुमार आनंद पिछले ढाई साल से पटेल नगर विधानसभा से विधायक हैं। उन्हें यहां की जनता से खूब प्यार मिल रहा है। लोगों की मानें तो इस छोटी-सी अवधि में राजकुमार ने अपनी विधानसभा के हर क्षेत्र में शानदार काम किया है। राजकुमार की मेहनत और सादगी को अरविंद केजरीवाल भी पसंद करते हैं।

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