महाराष्ट्र का मुस्लिम किसके साथ? ओवैसी-अखिलेश बढ़ा रहे AAP की टेंशन

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में अगले साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जहां सोमवार (9 दिसंबर) को आम आदमी पार्टी ने अपने 20 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की तो वहीं मंगलवार को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने मुस्तफाबाद सीट पर बड़ा दांव चल दिया है।

दिल्ली दंगों का आरोपी है ताहिर हुसैन

असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्तफाबाद सीट से दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को चुनावी मैदान में उतारा है। अब दिल्ली की मुस्तफाबाद सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। क्योंकि फिर से मुस्तफाबाद सीट पर 2015 वाला ही समीकरण बनता दिख रहा है। 2015 के विधानसभा चुनाव में भी मुस्लिम बंट गए थे, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला था।

मुस्तफाबाद सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा

बताया गया कि मुस्तफाबाद विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। एआईएमआईएम पार्टी से ताहिर हुसैन के मैदान में आने से मुस्लिम वोट बंटने की उम्मीद है। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस सीट से जगदीश प्रधान को उतारा था।

2015 के चुनाव में बीजेपी को हुआ था फायदा

मुस्लिम वोटों के बंटने से बीजेपी को फायदा हुआ था और जगदीश प्रधान विधायक बन गए थे। अगर इस बार भी मुस्लिम वोट बंटे तो भाजपा का इस सीट पर रास्ता साफ है। आम आदमी पार्टी ने इस सीट से आदिल खान को मैदान में उतारा है।

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हाजी यूनुस से ताहिर हुसैन की कभी नहीं बनी

मुस्तफाबाद से मौजूदा विधायक हाजी यूनुस से ताहिर हुसैन की कभी बनी नहीं है। वर्ष 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद हुए दिल्ली नगर निगम चुनाव में मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र के दो मुस्लिम बहुल वार्ड मुस्तफाबाद व ब्रिजपुरी कांग्रेस ने जीते थे। आप प्रत्याशी हार गए थे।
ब्रजपुरी वार्ड में ओवैसी की पार्टी के प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। मुस्तफाबाद विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। ताहिर के आने से मुस्लिम वोट बंटने की उम्मीद है।

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