हत्या के मामले में पूर्व मंत्री को उम्रकैद, 40 हजार का जुर्माना भी

छपरा, विधानसभा चुनाव के दौरान बूथ पर एक युवक की गोली मारकर हत्या के मामले में पूर्व मंत्री रविंद्र नाथ मिश्र को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक सप्ताह पहले इस मामले की सुनवाई हुई थी, जिसमें कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है।

साल 1990 में विधानसभा चुनाव के दौरान माझी के बूथ पर एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसी मामले में छपरा व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय एमपी एमएलए विशेष कोर्ट के न्यायाधीश ने मंगलवार को रविंद्र नाथ मिश्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

पूर्व मंत्री रविंद्र नाथ मिश्र को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय सह विशेष कोर्ट नलिन कुमार पांडे ने दोषी करार दिया था। उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 171 (एफ) 136 (2) में दोषी करार दिया गया। वहीं, उनके भाई हरेंद्र मिश्र को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।

रविंद्र मिश्रा साल 2000 में मांझी विधानसभा से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। वे राबड़ी देवी के सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री थे।

क्या है मामला

जानकारी के अनुसार 27 फरवरी 1990 में चुनाव के दौरान मांझी प्रखंड के बूथ संख्या 175 और 176 पर बूथ लूटने की मंशा से कुछ लोगों ने हमला बोल दिया था। इस दौरान बदमाशों ने फायरिंग भी की। जिसमें वोट डालने आए एक व्यक्ति उमा बीन की गोली लगने से मौत हो गई थी।

वारदात के बाद इस मामले में बूथ संख्या 175 के पीठासीन अधिकारी प्रणय कुमार मल्लिक व बूथ संख्या 176 के पोलिंग एजेंट महेश प्रसाद यादव ने मांझी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महेश प्रसाद यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार रविन्द्र नाथ मिश्र और उनके भाई हरेंद्र मिश्र पर हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

इस मामले में दर्ज मांझी थाना कांड संख्या 28/90 के सत्रवाद संख्या 143/06 में अभियोजन की ओर से एपीपी ध्रुपदेव सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। अभियोजन की ओर से कुल सात गवाहों ने गवाही दी थी।

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